Home IIT JEE Hardwork leads to success- JEE Main Jan 2020

Hardwork leads to success- JEE Main Jan 2020

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एक ‘इच्छा’ कुछ नहीं बदलती, एक ‘निर्णय’ कुछ बदलता है।

लेकिन यदि करलो दृढ निश्चय तो वह “निश्चय” सब कुछ बदल देता है।

ऐसा ही  दृढ निश्चय किया पूर्णिया, बिहार के रहने वाले छात्र हिमांशु ने जिसने इंजीनियर बनने का सपना देखा और अपने सपने को पूरा करने की चाह में वह कोटा आ गया।

कोटा आकर उसने शहर के एक प्रतिष्ठित संसथान में एडमिशन ले लिया और 2 साल तक वहां जेईेई के तैयारी की किन्तु जब परिणाम सामने आया तो हिमांशु को बहुत निराशा हुई क्योंकि उसके जेईई मेन में सिर्फ 37 परसेंटाइल बने थे। हिमांशु के पिता एक किसान है और आर्थिक स्थिति भी इतनी अच्छी नहीं है। हिमांशु ड्राप लेकर एक बार फिर से कोशिश करना चाहता था लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण वह असमंजस में था।  उसने अपने दोस्तों से सुना था की मोशन के रिजल्ट्स बहुत अच्छे रहते है, खासकर रिपीटर्स बैच के और इस वर्ष उसके एक दोस्त का आईआईटी में चयन भी हुआ था जो कि मोशन का छात्र था। उसने मोशन का स्कालरशिप टेस्ट दिया जिसमे उसे अच्छी स्कालरशिप मिली, फिर हिमांशु ने मोशन में एडमिशन लेने का मन बना लिया।

उसके पिता ने कुछ रिश्तेदारों से पैसे उधार लेकर उसका एक बार फिर कोटा में एडमिशन करवा दिया। लेकिन इस बार हिमांशु ने अपने मन में दृढ निश्चय कर लिया था, अब उसे खुद के लिए नहीं उसके पिता के लिए पढ़ना था।

वह अब बहुत मन लगाकर पढ़ने लगा, इस बीच उसकी तबियत ख़राब होने के कारण गैप भी आया लेकिन उसने मोशन सोल्युशन लैब और मोशन Edu-Tab की मदद से सिलेबस रिकवर कर लिया।

सुनिए हिमांशु की कहानी उसी की ज़ुबानी।

हिमांशु का कहना है की उसे हमेशा एन. वी. सर से पढ़ने की प्रेरणा मिली, उनकी पॉजिटिव एनर्जी से वह बहुत प्रभावित हुआ। यदि कभी उसे निराशा भी होती तो एन. वी. सर और ऐ. वी. सर उसकी प्रेरणा का स्रोत बन उसे प्रेरित करते। उसने एन. वी. सर से सीखा की अगर पढ़ने की सही रणनीति बनाई जाए तो कम एफर्ट से भी अच्छे अंक लाये जा सकते है। हिमांशु बताते है की सुबह उठकर सबसे पहले अपनी डायरी में लिस्ट बनाते है की आज क्या क्या पढ़ना है और रात को सोते समय वह इस बात का ध्यान रखता है की कोई टॉपिक पढ़ने से छूट तो नहीं गया। जब हिमांशु के पिता उसके एडमिशन के लिए आये थे तब उनके अकाउंट में मात्र 5,000 रूपए की  राशि बची थी और यही बात उसके मन में बैठ गयी और उसे पढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करती रही। हिमांशु की मेहनत, शिक्षकों की प्रेरणा और उसके पिता के त्याग का ही परिणाम है की उसने जेईई मेन 2020 में 98 परसेंटाइल स्कोर अर्जित किया है।

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