Home IIT JEE ऑटो चालक का बेटा इंजीनियर बन करेगा पिता के सपनो को साकार

ऑटो चालक का बेटा इंजीनियर बन करेगा पिता के सपनो को साकार

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राह संघर्ष की जो चलता है, वो ही संसार बदलता है।

जिसने रातों से जंग जीती, सुबह सूर्य बनकर वही चमकता है।

आप कभी सोच सकते है की ऐसा बच्चा जो 11 वी कक्षा में फ़ैल हुआ हो और 12 वी में सिर्फ पासिंग मार्क्स आये हो, वह जेईई मेन जैसी परीक्षा में सलेक्ट हो सकता है। यह सच है, बस्ती, उत्तर प्रदेश के रहने वाले छात्र दीपक कुमार की ज़िंदगी में भी विफलता के अंधेरे के बाद जेईई मेन की सफलता का चमकता हुआ सूर्य उदय हुआ। दीपक ने अपनी स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय से प्राप्त की, वह शुरू से ही इंजीनियर तो बनना चाहता था, होनहार भी था लेकिन 11 वी कक्षा तक आते आते उसका पढाई की ओर रुझान कम हो गया और धीरे धीरे उसके मार्क्स गिरते चले गए और वह फ़ैल हो गया। उसने 12 वी कक्षा में थोड़ी मेहनत की और जैसे तैसे पास हो गया। कही न कही उसके मन में इंजीनियर बनने का सपना अभी जिन्दा था इसलिए वह कोटा आकर एक बार कोचिंग करना चाहता था । उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है, दीपक के पिता एक ऑटो चालक है और जैसे तैसे मेहनत करके अपना घर चलाते है ऐसे में उसे कोटा भेजना बहुत मुश्किल था। दीपक के चचेरे भाई ने गत वर्ष कोटा आकर कोचिंग की थी, उसने दीपक को मोशन के बारे में बताया, दीपक ने मोशन का स्कॉलरशिप टेस्ट दिया और उसे स्कॉलरशिप भी मिल गयी। दीपक के पिता शिक्षा को लेकर बहुत सजग है तो उन्होंने उसे कोटा भेज दिया।

दीपक बताते है की जब वह कोटा आया था तब उसके लिए सब कुछ नया था, उसे लगता था की वह शायद यहाँ के माहौल में नहीं ढल पायेगा लेकिन मोशन में आने के बाद में उसमे नयी ऊर्जा का संचार हुआ।  चाहे यहाँ के टीचर्स हो या अन्य स्टाफ के सदस्य सभी ने उसे बहुत सपोर्ट किया। दीपक अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा ऐन वी सर को मानता है। वह बोलता है की यहाँ के टीचर्स मेरे लिए भगवान के समान है, यदि कभी मेरा हौसला भी टुटा तो फिर ऐन वी सर हो या ऐ वी सर सभी ने मेरा हौसला बढ़ाया। उसकी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत उसके पिता भी थे, जिनका अति आवश्यक  ऑपरेशन होना है लेकिन पैसों की कमी के चलते, बच्चो की पढाई के खातिर वह अपना ऑपरेशन टाल रहे है  और दिन रात ऑटो चलाकर पैसे कमाते है। दीपक का कहना है की उनके गांव में कोई शिक्षा को महत्व नहीं देता और दीपक के माता पिता की भी बहुत उपेक्षा की जाती है। लेकिन उसके माता पिता अनपढ़ होने के बावजूद शिक्षा के महत्व को समझते है और अपने सभी बच्चो को शिक्षित करने में जुटे हुए है।

अपने माता पिता के त्याग और मोशन के सपोर्ट की मदद से दीपक ने अपनी विफलताओं से लड़कर आखिर सफलता की ओर कदम बढ़ा ही लिए।  दीपक के पिछले वर्ष जेईई मेन में मात्र 4 परसेंटाइल थी लेकिन इस वर्ष जेईई मेन 2020 में उसने 95 परसेंटाइल लाकर यह साबित कर दिया की मेहनत अगर सच्ची हो तो कामयाबी एक दिन जरूर आपके सामने होगी ।

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