Home IIT JEE गहने गिरवी रखकर बेटे को पढ़ाया, अब बेटा बनेगा IITian

गहने गिरवी रखकर बेटे को पढ़ाया, अब बेटा बनेगा IITian

21 min read
0
0
395

‘‘हमें छाँव में रखकर खुद जलते है धुप में ,
इंसान नहीं फरिश्ते होते है, वो माँ-पिता के रूप में।‘‘
यह सार्वभौमिक सत्य है की इस दुनिया में मां-बाप से बढ़कर कोई और नहीं होता क्योंकि, मां-बाप अपने बच्चों की खुशी के लिए अपनी जिंदगी की सारी खुशियां कुर्बान कर देते है। परिस्थतियां चाहे जैसी भी हो, लेकिन पेरेंट्स अपने बच्चों पर कभी आंच नहीं आने देते। वाराणसी के अनिल कुमार अपने आप को बहुत खुशनसीब मानते है की उन्हें इतना ही सपोर्ट करने वाले अभिभावक मिले। अनिल कोटा आकर आई आई टी के लिए कोचिंग करना चाहता था लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का कारण वह नहीं आ सका। जब उसके माता पिता को पता चला की अनिल आई आई टी की तैयारी करना चाहता है तो उन्होंने उसे कहा की तुम जाओ और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करो बाकि सब हम देख लेंगे।
दुनिया के हर अभिभावक का सिर्फ एक ही सपना होता है कि उनके बच्चे सफलता के नए आयामों को छुएं और निरंतर प्रगति करें। बच्चे की तरक्की के लिए अभिभावक अपनी ख्वाहिशों की परवाह किए बिना अपनी पूरी जिंदगी त्याग और बलिदान देते रहते है। ऐसा ही कुछ अनिल के माता पिता ने भी किया। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लेकिन जैसे तैसे अनिल का कोटा आना संभव हो पाया। यहाँ आकर अनिल ने मोशन में एडमिशन लिया, मोशन द्वारा भी अनिल को फीस में 75% की स्कालरशिप दी गयी। लेकिन इन सब के बाद भी अनिल के माता पिता की परेशानी कम नहीं हुई, कमजोर आर्थिक स्थिती के कारण अनिल को पैसे भेजने के लिए उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा, यहाँ तक की उन्होंने अनिल को बिना बताये अपने गहने भी गिरवी रख दिए। बस उनका एक ही उद्देश्य था की अनिल को अपनी पढ़ाई को लेकर किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

अनिल ने बताया की वह फिजिक्स में बहुत कमजोर था, शुरूआती समय में पढ़ने की आदत ना होने के कारण मार्क्स भी कम आते थे। कभी कभी तो अनिल को लगा की सब कुछ छोड़ कर वापस चले जाना चाहिए। लेकिन मोशन की फैकल्टी खासकर ऐन वी सर और आर आर डी सर ने हमेशा उसे मोटीवेट किया। जब भी कभी अनिल का हौसला टूटता तो उसके माता पिता, मोशन के अध्यापक हमेशा उसका हौसला बढ़ाते। जिसकी वजह से अनिल आज जे ई ई मेन और जे ई ई एडवांस्ड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओ में सफलता प्राप्त कर पाया। परीक्षा से पहले अनिल की तबियत खराब होने के कारण उसे 2 महीने के बेडरेस्ट पर रहना पड़ा, लेकिन माता पिता द्वारा किये गए त्याग ने उसे हमेशा पढ़ने का हौसला दिया और वह पीछे नहीं हटा।
अनिल के माता पिता का सपोर्ट और त्याग ही था जो अनिल सफलतापूर्वक अपनी मंजिल की ओर यह कदम बढ़ा पाया। अनिल की जे ई ई मेन में 573 वी रैंक आयी है और जे ई ई एडवांस्ड में 835 वी रैंक है। धन्य हें वह सभी अभिभावक जो अपने बच्चो के सपनो को पूरा करने के लिए और उन्हें कामयाबी के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान कर देते है। उन्ही के त्याग और मेहनत की वजह से बच्चे सफलता की बुलंदियों को छू पाते है।

Comments

comments

Load More Related Articles
  • 7 Secrets of Motion to crack JEE/NEET

    Every year around 20-30 lakh students appear for JEE/NEET exams and around 20,000 to 25,00…
  • Motivation JEE Main 2020 Result- Success Story

    ना पूछो मेरी मंजिल कहा है, अभी तो सफर का इरादा किया है, हौसला ना हारा है ना हारूंगी, मेरे …
  • Hardwork leads to success- JEE Main Jan 2020

    एक ‘इच्छा’ कुछ नहीं बदलती, एक ‘निर्णय’ कुछ बदलता है। लेकिन यदि करल…
Load More In IIT JEE
Comments are closed.

Check Also

Live Capsule Course by Motion for JEE/NEET July 2020 Aspirants

Online Capsule course is designed for students who wish to get selected in JEE Main 2020 o…